CWG Cricket: हरमनप्रीत की कप्तानी ने धोनी और वर्ल्ड कप 2007 की याद दिलाई, भारत फाइनल में पहुंचा


नई दिल्ली. भारत की महिला क्रिकेट टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games 2022) के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है. उसने बेहद रोमांचक सेमीफाइनल में गोल्ड की दावेदार मेजबान इंग्लैंड को हराया. भारतीय टीम (Indian Womens) ने यह मुकाबला 4 रन से जीता. यह पहला मौका है जब भारत कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में क्रिकेट का मेडल जीतेगा. महिला टीम की इस उपलब्धि के लिए खिलाड़ियों की तारीफ तो करनी ही होगी, लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) के उस साहसिक फैसले को भी सलाम करना होगा, जो उन्होंने आखिरी ओवर से पहले लिया.

बर्मिंघम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 5 विकेट पर 164 रन बनाए. इसके जवाब में इंग्लैंड ने 19 ओवर में 5 विकेट पर 151 रन बना लिए थे. उसे जीत के लिए आखिरी ओवर में 14 रन बनाने थे. क्रीज पर कैथरीन ब्रंट और मारिया बूशियर थीं. यह दोनों ही बैटर बड़े शॉट लगाने के लिए जानी जाती हैं. ऐसे में भारतीय टीम की राह आसान नहीं लग रही थी.

दूसरी ओर, भारतीय टीम की बात करें तो उसके पास आखिरी ओवर की गेंदबाजी के कई विकल्प मौजूद थे. मीडियम पेसर रेणुका सिंह और मेघना सिंह के ओवर बाकी थे. बाएं हाथ की स्पिनर राधा यादव के 2 ओवर भी बचे थे. लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) ने इनमें से किसी को गेंद नहीं सौंपी. इन तीनों की बजाय उन्होंने ऑलराउंडर स्नेह राणा (Sneh Rana) पर भरोसा जताया, जो ऑफ स्पिनर हैं.

अगर क्रीज पर दाएं हाथ के 2 बैटर मौजूद हों, जो बड़े शॉट खेल सकते हों तो ऐसा कम ही देखा गया है कि आखिरी ओवर ऑफ स्पिनर से करवाया जाय. वह भी तब जब कप्तान के पास दो मीडियम पेसर का विकल्प मौजूद हो और मैच इंग्लैंड में हो रहा हो. अगर पिच स्पिनरों की मददगार हो तब भी ऐसे मौकों पर ऑफ स्पिनर की जगह बाएं हाथ के स्पिनर या लेग स्पिनर को मौका दिया जाता है.

क्रिकेटप्रेमी भूले नहीं होंगे कि 2007 में खेले गए टी20 विश्व कप के फाइनल में भी तकरीबन ऐसी ही स्थिति बनी थी. तब क्रीज पर पाकिस्तान के कप्तान मिस्बाह उल हक क्रीज पर मोहम्मद आसिफ के साथ मौजूद थे. पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन बनाने थे. भारत अपने तीनों पेसर आरपी सिंह, एस. श्रीसंथ और इरफान पठान से 4-4 ओवर करा चुका था. अब जोगिंदर शर्मा, हरभजन सिंह के एक-एक ओवर बाकी थे. ऑलराउंडर यूसुफ पठान से गेंदबाजी कराने का विकल्प भी मौजूद था. यानी एक तरह से कप्तान धोनी को अनुभवी ऑफ स्पिनर हरभजन और अपने करियर का सिर्फ चौथा मैच खेल रहे मीडियम पेसर जोगिंदर शर्मा में से किसी एक को चुनना था. धोनी ने जोगिंदर पर दांव खेला, जो कामयाब रहा.

इंग्लैंड के खिलाफ आज खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले की बात करें तो हरमनप्रीत कौर के पास धोनी के मुकाबले कहीं ज्यादा विकल्प मौजूद थे. उनके पास रेणुका सिंह जैसी गेंदबाज विकल्प थीं, जो पिछले 3 मैच में 9 विकेट ले चुकी थीं. मेघना सिंह का प्रदर्शन भी टूर्नामेंट में अच्छा रहा था. ऐसे में ऑफ स्पिनर को गेंदबाजी सौंपना जोखिमभरा फैसला था. वह भी आज के दौर में. जब आपके हर फैसले की बाल की खाल निकाली जाती है. ऐसे में आखिरी ओवर ऑफ स्पिनर को सौंपकर हरमनप्रीत कौर ने बता दिया कि वे आगे की सोच रखती हैं. अगर कप्तान लीक से हटकर सोच रहा हो और जोखिम लेने से ना घबरा रहा हो तो टीम का आगे बढ़ना तय है. यकीनन, जीत का सबसे बड़ा श्रेय आखिरी ओवर करने वालीं स्नेह राणा को ही जाएगा. रिकॉर्डबुक उन्हीं का नाम याद रखेगा. लेकिन क्रिकेट को जीने वाले खेलप्रेमियों के लिए सिर्फ आंकड़े महत्व नहीं रखते. वे उन चीजों को भी बरसों याद रखते हैं, जिन्होंने मैच में असर डाला था और भले ही वह कागजों पर बहुत यादगार तरीके से दर्ज ना किया गया हो.

Tags: Commonwealth Games, Cwg, Harmanpreet kaur, Sneh Rana, Womens Cricket



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