Xiaomi-ED मामला : कंपनी का आरोप, उसके अफसरों को दी गई मारपीट की धमकी


चीनी टेक दिग्‍गज, शाओमी इंडिया (Xiaomi) देश में कानूनी अड़चनों का सामना कर रही है। उसके खिलाफ रॉयल्‍टी पेमेंट्स की जांच चल रही है। कंपनी ने मामले की जांच कर रही सरकारी एजेंसी पर शारीरिक हिंसा की धमकी देने का आरोप लगाया है। एक कोर्ट फाइलिंग में यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक, भारत के फाइनेंशियल क्राइम वॉचडॉग द्वारा एक जांच के दौरान कंपनी के टॉप एग्‍जीक्‍यूटिव्‍स को शारीरिक हिंसा की धमकी दी गई। कंपनी ने यह आरोप भी लगाया है कि एजेंसी ने उस पर शिकंजा कसने के लिए अन्‍यायपूर्ण तरीका इस्‍तेमाल किया। 

शाओमी की ओर से देश के प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सबसे पहले रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट डॉक्‍युमेंट्स में शाओमी की तरफ से कहा गया है कि इंडिया में उसके पूर्व मैनेजिंग डायरेक्‍टर और मौजूदा चीफ फाइनेंशियल ऑफ‍िसर दोनों से पूछताछ के दौरान गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। आरोप है कि ईडी दोनों को कुछ डॉक्‍युमेंट्स जमा करने के लिए मजबूर कर रही थी। हालांकि ईडी ने इन दावों को झूठा बताया है। उसने कहा है कि Xiaomi के दावे झूठे और निराधार हैं। उसने कहा है कि कंपनी के अधिकारियों ने बेहद अनुकूल माहौल में अपनी इच्‍छा से गवाही दी थी। 

4 मई की इस कोर्ट फाइलिंग ने मामले में नया मोड़ ला दिया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने विदेशों में संदिग्ध रॉयल्टी भुगतान के लिए लगभग 725 मिलियन डॉलर भेजे थे। वहीं, Xiaomi ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। दावा किया है कि उसके रॉयल्‍टी पेमेंट वैध और सही थे। इस पूरे मामले के तहत पिछले साल दिसंबर में इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने चीनी मोबाइल कंपनियों Xiaomi, Oppo, OnePlus और कुछ अन्य चीनी फिनटेक फर्मों को सर्च किया था। कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कंपनियों से संबंधित परिसरों की तलाशी ली गई थी। 

ED ने अपनी जांच में पाया है कि Xiaomi ने संबंधित उद्यमों के साथ लेनदेन के प्रकटीकरण के लिए रेगुलेटरी आदेश का पालन नहीं किया था। शाओमी के बहीखातों में विदेशी निधियों को शामिल किया गया है, लेकिन पता चला है कि जिस सोर्स से इस तरह का पैसा मिला, वो डाउटफुल है। कथित तौर पर ऋणदाता की कोई साख नहीं है। यह रकम करोड़ों रुपये की है, जिस पर ब्‍याज खर्च का दावा भी किया गया है। 
 

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